क्या आप भी अपनी फैमिली प्लान करने के बारे में सोच रहे हैं? या शायद आप और आपके पार्टनर काफी समय से कोशिश कर रहे हैं लेकिन सफलता नहीं मिल रही? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। फर्टिलिटी एक ऐसा टॉपिक है जिसके बारे में हमारे समाज में आज भी बहुत सारी गलतफहमियां यानी मिथ्स फैले हुए हैं।
जैसे-जैसे हम 2026 की तरफ बढ़ रहे हैं, मेडिकल साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है। अब हमारे पास एडवांस टेक्नोलोजी और गहरा रिसर्च मौजूद है। लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि आज भी बहुत से कपल्स पुराने और गलत मान्यताओं पर भरोसा करके अपना कीमती समय बर्बाद कर देते हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी का भंडार है, जो अक्सर मदद करने के बजाय कन्फ्यूजन ज्यादा बढ़ाता है।
आज के इस ब्लॉग में, हम Top 10 Fertility Myths का पर्दाफाश करेंगे। हम साइंस और लॉजिक के साथ समझेंगे कि सच क्या है और आपको किन बातों पर अब बिल्कुल भी विश्वास नहीं करना चाहिए। तो चलिए, 2026 में कदम रखने से पहले इन गलतफहमियों को हमेशा के लिए पीछे छोड़ दें!
Myth 1: इनफर्टिलिटी (नि:संतानता) केवल महिलाओं की समस्या है
यह शायद दुनिया का सबसे पुराना और सबसे कॉमन मिथ है। जब भी किसी कपल को बच्चा नहीं होता, तो समाज की उंगलियां अक्सर महिला की तरफ उठती हैं। लेकिन 2026 में इस सोच को बदलने की सख्त जरूरत है।
सच्चाई क्या है?
मेडिकल फैक्ट्स बताते हैं कि इनफर्टिलिटी कपल की समस्या होती है, न कि सिर्फ महिला की।
• मेल फैक्टर: लगभग 30% से 40% मामलों में समस्या पुरुष (Male) पार्टनर में होती है। इसमें लो स्पर्म काउंट, स्पर्म मोटिलिटी (गति) कम होना, या स्पर्म की बनावट (Morphology) में कमी शामिल हो सकती है।
• फीमेल फैक्टर: लगभग 30% से 40% मामलों में समस्या महिला पार्टनर में होती है।
• कम्बाइंड फैक्टर: बाकी के 20% से 30% मामलों में समस्या दोनों में हो सकती है या फिर कारण "Unexplained" (अज्ञात) हो सकता है।
नजरिया क्यों बदला जाना चाहिए?
अगर हम केवल महिला का चेकअप करवाते रहेंगे और पुरुष का नहीं, तो इलाज में बहुत देरी हो सकती है। डॉक्टर के पास जाने पर दोनों पार्टनर्स का चेकअप और टेस्ट होना अनिवार्य है। याद रखें, इनफर्टिलिटी कोई शर्म की बात नहीं है, यह एक मेडिकल कंडीशन है जिसका इलाज संभव है।
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Myth 2: उम्र का असर केवल महिलाओं की फर्टिलिटी पर पड़ता है
हम सबने "बायोलॉजिकल क्लॉक" के बारे में सुना है, लेकिन अक्सर यह माना जाता है कि यह घड़ी सिर्फ महिलाओं के लिए टिक-टिक कर रही है। लोग सोचते हैं कि पुरुष चाहे 50 या 60 साल के भी हों, वो आसानी से पिता बन सकते हैं।
सच्चाई क्या है?
हाँ, यह सच है कि महिलाओं के लिए उम्र एक बहुत बड़ा फैक्टर है, खासकर 35 साल के बाद। लेकिन पुरुषों की फर्टिलिटी भी उम्र के साथ कम होती है।
• स्पर्म क्वालिटी: 40-45 साल की उम्र के बाद पुरुषों में स्पर्म की क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों गिरने लगती हैं।
• DNA डैमेज: उम्र बढ़ने के साथ स्पर्म के DNA में डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे न केवल प्रेगनेंसी में देरी हो सकती है, बल्कि गर्भपात और बच्चे में जेनेटिक समस्याओं (जैसे ऑटिज्म) का रिस्क भी बढ़ सकता है।
2026 के लिए सलाह:
अगर आप फैमिली प्लानिंग में देरी कर रहे हैं, तो यह न सोचें कि पुरुष पार्टनर की उम्र का कोई असर नहीं पड़ेगा। दोनों की उम्र मायने रखती है।
Myth 3: "बस रिलैक्स करो, स्ट्रेस की वजह से प्रेगनेंसी नहीं हो रही"
क्या आपको भी किसी रिश्तेदार या दोस्त ने यह कहा है— "तुम बहुत ज्यादा सोचती हो, बस रिलैक्स करो, छुट्टी पर जाओ, सब ठीक हो जाएगा"? यह बात सुनने में अच्छी लग सकती है, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है।
सच्चाई क्या है?
इनफर्टिलिटी एक मेडिकल कंडीशन है, कोई मानसिक वहम नहीं।
• सीधा संबंध नहीं है: स्ट्रेस अपने आप में इनफर्टिलिटी का मुख्य कारण नहीं होता। अगर किसी की फैलोपियन ट्यूब्स ब्लॉक हैं या स्पर्म काउंट बहुत कम है, तो दुनिया की कोई भी वेकेशन या रिलैक्सेशन उसे ठीक नहीं कर सकती।
• अप्रत्यक्ष प्रभाव: हाँ, बहुत ज्यादा स्ट्रेस आपके हॉर्मोन्स को थोड़ा डिस्टर्ब कर सकता है या आपकी लाइफस्टाइल खराब कर सकता है (जैसे स्मोकिंग करना या ज्यादा जंक फूड खाना), जो फर्टिलिटी को प्रभावित करता है। लेकिन "सिर्फ रिलैक्स करने" से मेडिकल समस्याएं ठीक नहीं होतीं।
इससे क्या नुकसान होता है?
जब लोग कपल्स को यह कहते हैं, तो कपल्स को लगता है कि गलती उनकी है क्योंकि वो "रिलैक्स" नहीं कर पा रहे। इससे उन पर और ज्यादा प्रेशर बढ़ जाता है। अगर आप एक साल (या 35 की उम्र के बाद 6 महीने) से कोशिश कर रहे हैं, तो रिलैक्स करने के बजाय डॉक्टर से मिलें।
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Myth 4: अगर आपका पहले एक बच्चा है, तो दूसरा बच्चा आसानी से हो जाएगा
इसे "सेकेंडरी इनफर्टिलिटी" के संदर्भ में समझना जरूरी है। बहुत से लोग सोचते हैं कि "मेरा शरीर तो पहले ही यह कर चुका है, तो अब क्या दिक्कत होगी?"
सच्चाई क्या है? (The Reality)
यह एक बहुत बड़ा मिथ है। सेकेंडरी इनफर्टिलिटी (दूसरे बच्चे के समय नि:संतानता की समस्या) उतनी ही कॉमन है जितनी प्राइमरी इनफर्टिलिटी।
• उम्र बढ़ना: पहले बच्चे और दूसरे बच्चे के बीच आपकी उम्र बढ़ चुकी होती है। अंडों की और स्पर्म की क्वालिटी में बदलाव आ सकता है।
• नए मेडिकल इश्यूज: पिछले बच्चे के जन्म के बाद हो सकता है कि कोई नई समस्या आ गई हो, जैसे कि गर्भाशय में फाइब्रॉएड, PCOD, या फिर वजन बढ़ना।
• लाइफस्टाइल में बदलाव: पहले बच्चे के बाद नींद की कमी, स्ट्रेस और डाइट में गड़बड़ी भी फर्टिलिटी पर असर डालती है।
क्या करना चाहिए?
अगर आप दूसरे बच्चे के लिए ट्राई कर रहे हैं और 6 महीने से 1 साल के अंदर सफलता नहीं मिल रही, तो यह मानकर न बैठें कि सब ठीक है। एक्सपर्ट की सलाह लें।
Myth 5: गर्भनिरोधक गोलियां लेने से भविष्य में इनफर्टिलिटी होती है
बहुत सी युवा महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियां (Contraceptive Pills) लेने से डरती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उनका शरीर "इनफर्टाइल" हो जाएगा और बाद में बच्चा पैदा करने में मुश्किल होगी।
सच्चाई क्या है?
यह पूरी तरह से गलत है। गर्भनिरोधक गोलियां आपके ओवुलेशन (अंडे बनने की प्रक्रिया) को सिर्फ तब तक रोकती हैं जब तक आप उन्हें ले रही हैं।
• कुछ वक्त का प्रभाव: जैसे ही आप गोलियां लेना बंद करती हैं, ज्यादातर महिलाओं का साइकिल कुछ हफ्तों या महीनों में नॉर्मल हो जाता है और वे प्रेग्नेंट हो सकती हैं।
Myth 6: IVF का मतलब हमेशा जुड़वा बच्चे ही होता है
In Vitro Fertilization (IVF) का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में जुड़वा (Twins) या तीन बच्चों की तस्वीर आती है। यह डर कई कपल्स को ट्रीटमेंट लेने से रोकता है क्योंकि वे एक साथ कई बच्चों की जिम्मेदारी नहीं उठाना चाहते।
सच्चाई क्या है?
यह पुरानी बात हो चुकी है। 2026 की टेक्नोलॉजी बहुत एडवांस है।आजकल अच्छे फर्टिलिटी क्लीनिक सिंगल एम्ब्रियो ट्रांसफर (SET) को बढ़ावा देते हैं। इसका मतलब है कि वे यूटरस में केवल एक ही सबसे बेस्ट एम्ब्रियो (भ्रूण) डालते हैं। इससे एक स्वस्थ बच्चे (Singleton pregnancy) होने के चांस बढ़ते हैं और रिस्क कम होता है।
क्या बदल गया है?
पहले डॉक्टर्स ज्यादा एंब्रियो डालते थे क्योंकि सक्सेस रेट कम था। अब टेक्नोलॉजी इतनी बेहतर है कि एक एम्ब्रियो से भी सफलता की दर बहुत ऊंची है।
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Myth 7: "मैं हेल्दी हूँ, एक्सरसाइज करता हूँ, मुझे इनफर्टिलिटी नहीं हो सकती"
बहुत से लोग जिम जाते हैं, अच्छा खाते हैं, सिगरेट-शराब नहीं पीते और उन्हें लगता है कि उनकी फर्टिलिटी एकदम परफेक्ट होगी। वे यह मानने को तैयार नहीं होते कि उन्हें कोई अंदरूनी समस्या हो सकती है।
सच्चाई क्या है?
बाहरी फिटनेस और अंदरूनी रिप्रोडक्टिव हेल्थ दो अलग चीजें हैं।
• छुपी समस्याएं: कई समस्याएं जैसे ब्लॉक फैलोपियन ट्यूब्स (बंद नलियां), लो स्पर्म काउंट, या एंडोमेट्रियोसिस का बाहर से कोई लक्षण नहीं दिखता। आप बाहर से बिल्कुल फिट दिख सकते हैं लेकिन अंदर से ये समस्याएं हो सकती हैं।
• जेनेटिक फैक्टर्स: कुछ फर्टिलिटी इश्यूज जेनेटिक होते हैं जिनका आपकी डाइट या जिम रूटीन से कोई लेना-देना नहीं होता।
हेल्दी लाइफस्टाइल बहुत अच्छी बात है और यह मदद जरूर करती है, लेकिन यह फर्टिलिटी की गारंटी नहीं है। अगर आप फिट हैं फिर भी कंसीव नहीं कर पा रहे, तो मेडिकल जांच जरूरी है।
Myth 8: अनियमित पीरियड्स का मतलब है कि आप कभी माँ नहीं बन सकतीं
अगर किसी महिला के पीरियड्स अनियमित हैं, तो उसे अक्सर डरा दिया जाता है कि उसे बच्चा नहीं होगा।
सच्चाई क्या है?
अनियमित पीरियड्स का मतलब इनफर्टिलिटी नहीं है, इसका मतलब है ओवुलेशन में समस्याएं।
• ओवुलेशन हो सकता है: अनियमित पीरियड्स वाली महिलाओं में भी ओवुलेशन होता है, बस यह पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है कि कब।
• इलाज संभव है: PCOD/PCOS अनियमित पीरियड्स का एक बड़ा कारण है। अच्छी बात यह है कि इसे लाइफस्टाइल में बदलाव और साधारण दवाओं से मैनेज किया जा सकता है। बहुत सी महिलाएं PCOD के साथ भी नैचुरली कंसीव करती हैं।
Myth 9: विशेष डाइट लेने से जल्दी प्रेगनेंसी हो जाएगी
इंटरनेट पर "फर्टिलिटी डाइट" के नाम पर बहुत सारे टोटके वायरल होते हैं। जैसे— "अनानास का बीच वाला हिस्सा खाओ, इम्प्लांटेशन हो जाएगा" या "ग्लूटेन छोड़ दो, तुरंत प्रेग्नेंट हो जाओगी।"
सच्चाई क्या है?
कोई भी एक "मैजिक फूड" नहीं है जो आपको प्रेग्नेंट बना सके। लेकिन प्रोटीन, विटामिन्स, हरी सब्जियां और गुड फैट्स से भरपूर संतुलित आहार (Balanced Diet) लेने से आपकी फर्टिलिटी जरूर बेहतर हो सकती ही।
Myth 10: फर्टिलिटी ट्रीटमेंट (IVF/IUI) का मतलब 100% सफलता है
कुछ कपल्स यह सोचते हैं कि "चलो अभी करियर पर फोकस करते हैं, बाद में IVF तो है ही।" उन्हें लगता है कि IVF एक जादू की छड़ी है जो कभी भी प्रेगनेंसी दे सकती है।
सच्चाई क्या है?
IVF एक बहुत ही सफल तकनीक है, लेकिन यह 100% गारंटी नहीं है।
• सफलता दर: IVF की सफलता दर (Success Rate) लगभग 40% से 50% (प्रति साइकिल) होती है, यह उम्र के साथ घटती जाती है। 40 की उम्र के बाद यह दर काफी कम हो जाती है।
• शारीरिक और आर्थिक स्थिति: फर्टिलिटी ट्रीटमेंट भावनात्मक, शारीरिक और आर्थिक रूप से थकाने वाला हो सकता है। यह हमेशा "Plan B" के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
IVF चमत्कार कर सकता है, लेकिन यह आपकी उम्र और एग/स्पर्म की क्वालिटी पर निर्भर करता है। इसे अंतिम उपाय के रूप में न रखें और न ही इसे "गारंटी" मानें।
निष्कर्ष:
2026 में, इन पुराने फर्टिलिटी मिथ्स को पीछे छोड़ना ज़रूरी है—याद रखें कि समस्या पुरुष और महिला दोनों में हो सकती है, उम्र दोनों के लिए मायने रखती है, स्ट्रेस एकमात्र कारण नहीं है, और बाहरी स्वास्थ्य (फिटनेस) फर्टिलिटी की गारंटी नहीं है; हमेशा ऑनलाइन टोटकों के बजाय डॉक्टर की सलाह लें। यदि आप या कोई परिचित फर्टिलिटी समस्याओं का सामना कर रहा है, तो आज ही इन मिथ्स को भूलकर किसी फर्टिलिटी एक्सपर्ट से कंसल्ट करें, क्योंकि सही समय पर मिली सही जानकारी ही आपके माता-पिता बनने के सपने को पूरा करने की कुंजी है। जागरूक बनें और स्वस्थ रहें!


