असिस्टेड रीप्रोडक्टीव्ह टेक्नोलॉजी (ART) के बारे में जाने सब कुछ

१ साल से अधिक समय हो गया लेकिन प्रयास के बावजूद भी गर्भधारण नहीं हो रहा है? तो आपको असिस्टेड रीप्रोडक्टीव्ह टेक्निक (ART) की मदत लेनी चाहिए। ART यानि अनेक फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का समूह। जिसकी मदत से आजतक लाखो दम्पतियों ने माता-पिता बनने की ख़ुशी हांसिल की है। आपके के लिए सही ट्रीटमेंट जानने के लिए और ART के बारे में अधिक जानकारी के लिए ब्लॉग जरूर पढ़े।

Share This Post

असिस्टेड रिप्रॉडक्टिव्ह टेक्नॉलॉजी (ART) क्या हैं?

असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) यानि बहोतसे फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का समूह। जो जोड़े पारम्परिक तरीके से गर्भधारण करने में असफल होते है, उन सभी के लिए ART तकनीक गर्भधारण में मददगार है।

ART टेक्नोलॉजी में फर्टिलिटी दवा की मदत से ओवरियन स्टिम्युलेशन करना, ओवुलेशन के दौरान गर्भशय में स्पर्म ट्रांसफर करना, शरीर के बाहर शुक्राणु और स्त्रीबीज का फर्टिलाइज़ेसन करके गर्भ बनाना, गर्भ को लैब में बढ़ाना, गर्भ को माता के शरीर में ट्रांसफर करना, अच्छे क्वालिटी का एम्ब्रियो सिलेक्ट करना, डोनर एग या स्पर्म का उपयोग, सरोगसी बहोतसी ऐसी प्रक्रियाएँ शामिल है।

ART तंत्रज्ञान का इतिहास और विकास

ART फर्टिलिटी उपचारों की एक श्रृंखला है। जिसका उपयोग कई जोड़े गर्भधारण करने के लिए करते है, खासकर जब वो प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण करने में असफल होते है। ART तंत्रज्ञान का सफल सफर १९७० के दशक के शुरू हुआ।  १९७० के अंत में दुनिया की पहली “टेस्ट-ट्यूब बेबी” लुईस ब्राउन का जन्म हुआ। तब से लेकर आज तक टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक रिसर्च में हुई प्रगति ने विभिन्न तकनीकों को जन्म दिया है। एडवांस IVF इलाज, ICSI, क्रायोप्रिजर्वेशन और प्री जेनेटिक टेस्टिंग का विकास हुआ है। जिनकी मदत से बेसिक IVF ट्रीटमेंट की तुलना में १०-१५% गर्भधारण की सम्भावना बढ़ती है।

ART से सम्बंधित ५ फैक्ट्स :

१) ART में बहोतसे इलाज उपलब्ध है।

ART इलाज में दवाइयों से लेकर बेसिक और एडवांस फर्टिलिटी इलाज शामिल है। आइए उनमेसे कुछ लोकप्रिय इलाज को जानते है।

IVF : इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन यह एक आम, सबसे ज्यादा प्रचलित, लोकप्रिय और सबसे ज्यादा इस्तमाल की जानेवाली तकनीक है। जहां स्त्रीबीज और शुक्राणु को लैब में एक पेट्री डिश में मिलाया जाता है और फर्टिलाइज़ेशन के लिए छोड़ दिया जाता है। फिर बना हुआ गर्भ इम्प्लांटेशन के लिए गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। 

IUI : इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन यह एक प्राथमिक ART इलाज है। जिसमें फर्टिलाइज़ेशन रेट बढ़ाने के लिए शुक्राणुओं को गर्भाशय में ट्रांसफर करते है। कुछ केसेस में, जोड़े जरूरत पड़ने पर डोनर एग या डोनर स्पर्म का उपयोग कर सकते हैं।

ICSI – IMSI – PICSI : यह सभी उन्नत IVF तकनीकें हैं जिनका उपयोग इनफर्टिलिटी से जूझ रहे जोड़ों की मदद के लिए किया जाता है। वन्ध्यत्व की समस्या पुरानी होनेपर या फर्टिलिटी इलाज असफल रहनेपर या अन्य कॉम्प्लिकेटेड कैसेस में भी यह तकनीक से अच्छे रिज़ल्ट मिलते है। ICSI यानि यानि इंट्रासायटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन। ICSI में शुक्राणु को सीधे स्त्रीबीज में इंजेक्ट करना और गर्भ बनाना शामिल है। IMSI प्रक्रिया में फर्टिलाइज़ेशन के लिए सबसे अच्छे शुक्राणु का चयन करना और उसे स्त्रीबीज में इंजेक्ट करना शामिल है। स्पर्म सिलेक्शन के लिए माइक्रोस्कोप का उपयोग करते है। PICSI प्रक्रिया में फिजिकली अच्छे शुक्राणु का चयन करना और इसलिए एक स्पेशल डिश का उपयोग करना शामिल  है। 

LAH : लेजर असिस्टेड हैचिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एम्ब्रियो इम्प्लांटेशन की सम्भावना बढ़ाने के लिए  भ्रूण के बाहरी आवरण में एक छोटा सा छेद किया जाता है। 

स्पर्म रिट्राइवल : TESA, PESA, माइक्रो TESE यह एडवांस स्पर्म रिट्राइवल टेक्निक है, जिसका उपयोग फर्टिलिटी इलाज में किया जाता है। इस प्रक्रिया में सीधे अंडकोष या एपिडीडिमिस से शुक्राणु को पुनः प्राप्त करना शामिल है। 

PGT-A : प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक डायग्नोसिस में सफल गर्भावस्था की संभावना बढ़ाने के लिए एम्ब्रायो ट्रांसफर से पहले भ्रूण की अनुवांशिक जाँच करना शामिल है।

२) ART सक्सेस रेट अनेक कारकों पर निर्भर होता है।

ART उपचार का सफलता दर उम्र, बांझपन का कारण और यहां तक कि आपके द्वारा चुने गए क्लिनिक जैसे कारकों के आधार पर भिन्न हो सकता है। 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के लिए, सफलता दर लगभग 40-50% हो सकती है, लेकिन जैसे-जैसे महिलाओं की उम्र बढ़ती है यह संख्या कम हो जाती है। क्यों की बढ़ती उम्र के साथ स्त्रीबीजों की गुणवत्ता और फर्टिलिटी सेहत में गिरावट होती है। पिछली गर्भावस्था का इतिहास, समग्र स्वास्थ्य, तनाव का स्तर, आहार और व्यायाम जैसे जीवनशैली कारक भी ART सक्सेस रेट को प्रभावित करते है। हालाँकि, आधुनिक टेक्नोलॉजी और सुविधाओं में प्रगति ने निश्चित रूप से सफलता दर बढ़ाने में मदद की है। IVF जैसे उपचारों ने पिछले कुछ वर्षों में काफी आशाजनक परिणाम दिखाए हैं।

याद रहे, अच्छे रिज़ल्ट के लिए सही क्लिनिक का चयन करे, जहाँ आधुनिक सुविधाए, अत्याधुनिक ART तंत्रज्ञान और अनुभवी डॉक्टर उपलब्ध हो।

३) ART में हर तकनीक का खर्चा अलग-अलग होता है।

IVF उपचार की लागत हर जोड़े के लिए अलग-अलग होती है। क्योंकि कुछ मामलों में महिला इनफर्टिलिटी होती है, तो कुछ में पुरुष इनफर्टिलिटी। इसके आलावा इनफर्टिलिटी का कारन भी अलग-अलग होता है। इनफर्टिलिटी की गंभीरता अलग होती है। इस कारन डॉक्टरों से इस्तमाल किए जानेवाले ट्रीटमेंट प्लान भी अलग अलग हो सकती है। कुछ को दवा से परिणाम मिलते हैं, कुछ को सर्जिकल उपचार से, जबकि कुछ को एडवांस IVF इलाज की आवश्यकता होती है। 

यह बात ध्यान रखे, की ART इलाज से गर्भधारण की सम्भावना कई गुना बढ़ जाती है। आपके लिए सही ट्रीटमेंट प्लान जानने के लिए फर्टिलिटी डॉक्टर की सलाह जरूर ले। 

प्रोजेनेसिस फर्टिलिटी सेंटर में पहले फ्री कंसल्टेशन के साथ आधुनिक सुविधाए और अनुभवी डॉक्टरों से इलाज होता है। यहाँ जोड़ों के टेस्ट रिजल्ट के अनुसार, हर कपल के लिए एक पर्सनलाइज ट्रीटमेंट प्लान बनाया जाता है। जो गर्भधारण की सम्भावना बढ़ता है।

४) सरोगसी या डोनर केस में क़ानूनी प्रक्रियाए शामिल है।

जब किसी कपल को डोनर प्रोग्राम की मदत लगती है, तब डोनर के बारे में जानकारी गुप्त रखी जाती है। इसके आलावा सरोगसी उपचार में बच्चे के जन्म के बाद उसे क़ानूनी तौर पर अपने माता-पिता को सौंपा जाता है। आम IVF इलाज में क़ानूनी प्रक्रिया की जरुरत नहीं होती है, क्योंकि इस प्रक्रिया खुद के शुक्राणु और स्त्रीबीज इस्तेमाल होते है।

५) भविष्य में ART क्षेत्र में रिसर्चर्स प्रगति का दावा कर रहे है।

रिसर्चर लगातार IVF और एग फ़्रीज़िंग जैसी तकनीकों को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं, जिससे इनफर्टिलिटी से जूझ रहे जोड़ों के लिए गर्भधारण करना आसान हो सके। ART इलाज में एम्ब्रियो की अनुवांशिक जाँच से लेकर पर्सनलाइज ट्रीटमेंट के जरिए गर्भधारण की राह आसान और अधिक यशस्वी हो रही है। ART में प्रगति को देखना प्रेरणादायी और आश्चर्यकारक है। 

भविष्य में ART में और भी प्रगति होने का दवा रिसर्चर करते है। जिसमे माइटोकॉन्ड्रियल रिप्लेसमेंट थेरेपी, CRISPR – जीन एडिटिंग टेक्निक और आर्टिफिशियल प्रेग्नेंसी की चर्चा है। भविष्य में होनेवाली प्रगति के बारे में वक्त ही हमें बताएगा।

अधिक सर्च किए जानेवाले प्रश्न :

ART टेक्नोलॉजी का उद्देश्य क्या है?

इनफर्टिलिटी से जुंज रहे जोड़ों को गर्भधारण करने में मदत करना ART का मुख्य उद्देश्य है। साथ ही ART इलाज सफल गर्भावस्था के साथ स्वस्थ बच्चे की भी सम्भावना बढ़ता है।

सहायक प्रजनन तकनीक कब बनाई गई थी?

1978 में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) के जरिए पहली IVF बेबी लुइस ब्राउन के जन्म के साथ ART की शुरुआत हुई थी। तब से, ART का उपयोग करके 5 मिलियन से अधिक कपल को माता-पिता बनने का सुभाग्य प्राप्त हुआ है।

Subscribe To Our Newsletter

Get updates and learn from the best

More To Explore

TESE and ICSI: Why are the two combined for successful results?

TESE and ICSI are two related treatments that help with male factor infertility. Men who do not generate sperm during ejaculation may have less sperm in the testicle, which can be extracted by TESE and used with ICSI to conceive a child.