IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) की जर्नी किसी भी कपल के लिए बहुत इमोशनल और उम्मीदों से भरी होती है। इस पूरी प्रोसेस में सबसे अहम और नाजुक पड़ाव होता है 'एम्ब्रियो ट्रांसफर'। एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद शुरू होता है 'टू वीक वेट' यानी वो दो हफ़्तों का समय, जब आपको प्रेगनेंसी टेस्ट के रिजल्ट का इंतजार करना होता है।
इस दौरान हर महिला के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि "अब मुझे अपनी डाइट में क्या शामिल करना चाहिए और किन चीजों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए?"
कई बार महिलाएं इस बात को लेकर बहुत स्ट्रेस में आ जाती हैं कि कहीं उनके कुछ गलत खाने से आईवीएफ साइकिल पर कोई बुरा असर न पड़ जाए। इसलिए, यह बहुत जरुरी है कि आपको सही न्यूट्रिशन और डाइट की पूरी जानकारी हो।
इस ब्लॉग में हम आसान शब्दों में, डिटेल में जानेंगे कि एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद आपकी डाइट कैसी होनी चाहिए, आपको क्या खाना चाहिए और किन चीजों को खाने से सख्त बचना चाहिए।
एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद सही डाइट क्यों जरुरी है?
एम्ब्रियो (भ्रूण) को यूट्रस (बच्चेदानी) में ट्रांसफर करने के बाद, उस एम्ब्रियो का यूट्रस की लाइनिंग से जुड़ना बहुत जरुरी होता है। इस प्रोसेस को 'इम्प्लांटेशन' कहते हैं।
एक अच्छी और हेल्दी डाइट आपके शरीर में हॉर्मोन्स का बैलेंस बनाए रखती है, यूट्रस में ब्लड फ्लो (खून का बहाव) को बेहतर करती है और यूट्रस की लाइनिंग को मजबूत बनाती है। जब आप सही न्यूट्रिशन लेती हैं, तो आपके शरीर को एम्ब्रियो को सपोर्ट करने और प्रेगनेंसी को सक्सेसफुल बनाने के लिए जरुरी ताकत मिलती है।
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एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद क्या खाएं?
अपनी डाइट को सिंपल, फ्रेश और न्यूट्रिशन से भरपूर रखें। यहाँ खाद्य श्रेणियों की सूची दी गई है जिन्हें आपको अपनी डेली डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए:
| खाद्य श्रेणी (Food Category) | क्या खाएं (What to Eat) | क्यों फायदेमंद है (Why it is Beneficial) |
|---|---|---|
| ताजे फल और हरी पत्तेदार सब्जियां | • पालक और ब्रोकोली • बेरीज (स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी) • केला और सेब | • हरी सब्जियों में फोलिक एसिड और आयरन होता है जो इम्प्लांटेशन और शिशु के मस्तिष्क विकास के लिए महत्वपूर्ण है। • बेरीज के एंटीऑक्सीडेंट्स सेल्स को सुरक्षित रखते हैं और टॉक्सिन्स बाहर निकालते हैं। • केला और सेब तुरंत ऊर्जा देते हैं और पाचन दुरुस्त करते हैं। |
| प्रोटीन से भरपूर आहार | • दालें और बीन्स (राजमा, छोले, मूंग आदि) • उबले अंडे और लीन चिकन • पनीर और टोफू | • एम्ब्रियो के विकास और शरीर के टिश्यूज की मरम्मत के लिए प्रोटीन बहुत आवश्यक है। |
| हेल्दी फैट्स (ओमेगा-3) | • नट्स और सीड्स (बादाम, अखरोट, चिया व अलसी के बीज आदि) • एवोकाडो • ऑलिव ऑयल (जैतून का तेल) | • शरीर में सूजन (inflammation) को कम करते हैं और IVF की सक्सेस रेट को बेहतर बनाते हैं। हार्मोन्स संतुलित रखते हैं। |
| साबुत अनाज | • ओट्स और दलिया • ब्राउन राइस और क्विनोआ | • फाइबर से भरपूर होने के कारण यह एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद होने वाली कब्ज (constipation) से बचाते हैं। |
| डेयरी प्रोडक्ट्स | • हल्का गर्म दूध • दही और छाछ | • दूध हड्डियों को मजबूत करता है। दही के प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं और गैस/इन्फेक्शन से बचाते हैं। |
| हाइड्रेशन (तरल पदार्थ) | • पानी (8 से 10 गिलास) • नारियल पानी | • पानी यूट्रस तक पोषक तत्वों को पहुंचाता है। नारियल पानी विटामिन्स और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होता है। |
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एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद किन चीजों से बचें? (क्या न खाएं)
जितना जरुरी यह जानना है कि क्या खाएं, उससे कहीं ज्यादा जरुरी यह जानना है कि किन चीजों से पूरी तरह दूर रहें। एक छोटी सी गलती भी आपके ट्रीटमेंट पर भारी पड़ सकती है।
| नुकसानदेह चीजें (Items to Avoid) | उदाहरण (Examples) | क्यों बचें (Why to Avoid) |
|---|---|---|
| कच्चा या आधा पका हुआ खाना | • कच्चा अंडा (मेयोनीज आदि) • कच्चा या अंडरकुक्ड मीट, सुशी • कच्चा दूध | • इसमें मौजूद बैक्टीरिया फूड पॉइज़निंग और इन्फेक्शन का कारण बन सकते हैं। |
| कैफीन का अधिक सेवन | • कॉफी और कड़क चाय • एनर्जी ड्रिंक्स | • कैफीन खून की नसों को सिकोड़ देता है, जिससे यूट्रस तक ब्लड फ्लो कम हो सकता है। |
| जंक और प्रोसेस्ड फूड | • पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, चिप्स • मैदा से बनी चीजें | • प्रिजर्वेटिव्स और अधिक नमक से शरीर में सूजन आ सकती है। मैदा कब्ज का कारण बनता है जो ट्रांसफर के बाद नुकसानदेह है। |
| ज्यादा चीनी और मीठा | • कोल्ड ड्रिंक्स, आइसक्रीम, पेस्ट्री, मिठाइयां | • ब्लड शुगर और इंसुलिन का स्तर अचानक बढ़ जाता है जो हार्मोनल बैलेंस बिगाड़ सकता है। |
| कुछ खास फल | • कच्चा पपीता • अनानास (Pineapple) | • कच्चे पपीते का लेटेक्स यूट्रस में सिकुड़न पैदा कर सकता है। अनानास का 'ब्रोमेलैन' यूट्रस की लाइनिंग को सॉफ्ट कर सकता, जिससे इम्प्लांटेशन फेल होने का रिस्क रहता है। |
| नशीले पदार्थ | • शराब (अल्कोहल) • स्मोकिंग (एक्टिव व पैसिव) | • भ्रूण के विकास को प्रभावित करता है और मिसकैरेज (गर्भपात) का खतरा काफी हद तक बढ़ा देता है। |
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डाइट के अलावा कुछ अन्य जरुरी टिप्स
डाइट के साथ-साथ आपकी डेली रूटीन का भी इस प्रोसेस पर बड़ा असर पड़ता है। एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद आपको इन बातों का भी खास ध्यान रखना चाहिए:
- स्ट्रेस बिलकुल न लें: 'टू वीक वेट' का समय बहुत एंग्जायटी वाला होता है, लेकिन स्ट्रेस हार्मोन्स आपके इम्प्लांटेशन प्रोसेस को ख़राब कर सकते हैं। खुद को खुश रखें, अच्छी किताबें पढ़ें, कॉमेडी मूवीज देखें और पॉजिटिव रहें।
- पूरी नींद लें: रोज रात को 7 से 8 घंटे की गहरी और सुकून भरी नींद लें। नींद के दौरान आपकी बॉडी खुद को हील करती है।
- हल्की एक्टिविटी करें: पूरा दिन बेड रेस्ट करना जरुरी नहीं है (जब तक कि डॉक्टर ने न कहा हो)। आप घर के अंदर हल्की वॉक कर सकती हैं। लेकिन भारी वजन उठाना, झुकना या बहुत ज्यादा मेहनत वाले काम बिलकुल न करें।
- दवाइयां और सप्लीमेंट्स: डॉक्टर ने आपको जो भी मेडिसिन्स, इंजेक्शन या फोलिक एसिड के सप्लीमेंट्स दिए हैं, उन्हें एकदम सही समय पर लें। कोई भी डोज मिस न करें।
निष्कर्ष
एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद की डाइट कोई बहुत मुश्किल या कॉम्प्लिकेटेड डाइट नहीं है। आपको बस घर का बना हुआ, फ्रेश, साफ़-सुथरा और न्यूट्रिशन से भरा हुआ सिंपल खाना खाना है। बाहरी खाने, जंक फ़ूड और स्ट्रेस से दूरी बनाकर रखनी है।
अपनी डाइट में कलर्स शामिल करें, यानी अलग-अलग रंग की सब्जियां और फल खाएं। यह आपके शरीर को हर वो विटामिन देगा जो एक नए जीवन को शुरू करने के लिए जरुरी है।
नोट: हर महिला का शरीर अलग होता है और उनकी मेडिकल कंडीशन भी अलग होती है। इसलिए अपनी डाइट में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले या कोई भी नई चीज शुरू करने से पहले अपने फर्टिलिटी डॉक्टर या डाइटिशियन से एक बार सलाह जरूर लें।
सकारात्मक रहें, अच्छी डाइट लें और अपने डॉक्टर पर भरोसा रखें। सब कुछ बहुत अच्छा होगा!



